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गंगा में मिल रहा सीवेज का पानी, नमामि गंगे की प्रगति पर उठे सवाल
प्रयागराज। गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। दारागंज और सलोरी क्षेत्र के आसपास गंगा में गिर रहे एक नाले के पानी को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि सीवेज युक्त पानी बिना पर्याप्त शोधन के सीधे गंगा में मिल रहा है, जिससे नदी की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाले का पानी गंगा में मिल रहा है, उसका रंग काला दिखाई देता है और उसमें से दुर्गंध भी आती है। उनका दावा है कि यह पानी आसपास के आवासीय क्षेत्रों से निकलने वाला सीवेज है, जो अंततः गंगा नदी में पहुंच रहा है।
बजट खर्च पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नागरिकों ने नमामि गंगे परियोजना के तहत स्वीकृत बजट के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गंगा की सफाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगातार बजट आवंटित किया जाता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि गंगा की सफाई और सीवेज प्रबंधन के लिए जारी धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और इसके बावजूद कई स्थानों पर नालों का पानी गंगा में क्यों पहुंच रहा है।

पशुओं की स्थिति भी चिंता का विषय
निरीक्षण के दौरान नाले के आसपास गाय और अन्य पशु भी दिखाई दिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंदे पानी और खुले नालों के बीच पशुओं का रहना न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
कुछ स्थानीय लोगों ने महाकुंभ के दौरान सीवेज शोधन और गंगा में छोड़े जाने वाले पानी को लेकर किए गए सरकारी दावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि शोधन व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर रही होती, तो वर्तमान में नालों से निकलने वाले पानी की स्थिति इतनी खराब नहीं दिखाई देती। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गंगा की स्वच्छता पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना शोधन के सीवेज लगातार गंगा में मिलता रहा, तो इससे नदी की जल गुणवत्ता, जलीय जीवों और आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। गंगा के तटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, ऐसे में नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल जांच कर यह सुनिश्चित करे कि गंगा में गिरने वाले सभी नालों का उचित शोधन हो। साथ ही, सफाई परियोजनाओं की प्रगति और बजट खर्च का सार्वजनिक विवरण भी जारी किया जाए ताकि लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके। गंगा की स्वच्छता को लेकर उठे ये सवाल एक बार फिर यह संकेत देते हैं कि नदी संरक्षण से जुड़े प्रयासों की प्रभावशीलता का नियमित मूल्यांकन और पारदर्शिता आवश्यक है।
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