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जर्जर भवन में फिर शुरू हुई आयुर्वेदिक ओपीडी, मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
वाराणसी। कबीर चौरा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय एक बार फिर अपने पुराने भवन में संचालित होने लगा है। हालांकि भवन की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में चिंता बनी हुई है। यह वही भवन है जिसे वर्ष 2024 में एक हादसे के बाद जर्जर घोषित कर बंद कर दिया गया था और अस्पताल की सेवाओं को अस्थायी रूप से दूसरे परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था।
अब कबीर चौरा परिसर में प्रस्तावित मल्टी स्पेशियलिटी भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के कारण आयुर्वेदिक चिकित्सालय को पुनः उसके पुराने परिसर में शिफ्ट कर दिया गया है।

2024 की घटना के बाद बंद हुआ था भवन
स्थानीय लोगों के अनुसार जुलाई 2024 में भवन के एक हिस्से से पटिया गिरने की घटना हुई थी, जिसमें एक नौ वर्षीय बच्चा घायल हो गया था। इसके बाद सुरक्षा कारणों से अस्पताल को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था।
हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिस हिस्से में वर्तमान में ओपीडी और चिकित्सा सेवाएं संचालित की जा रही हैं, उसकी मरम्मत और नवीनीकरण कराया गया है तथा जर्जर हिस्से को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
एक चिकित्सक ने बताया कि पीछे का क्षतिग्रस्त भाग पूरी तरह सील कर दिया गया है और मरीजों का प्रवेश केवल सुरक्षित घोषित किए गए हिस्से में ही कराया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन का दावा, सुरक्षित है वर्तमान परिसर
चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार अस्पताल को अस्थायी रूप से पुराने भवन के सामने वाले हिस्से में संचालित किया जा रहा है, जहां मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद चिकित्सा सेवाएं शुरू की गई हैं।
अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए ओपीडी, दवा वितरण और अन्य सेवाओं की व्यवस्था नए सिरे से की गई है। उन्होंने लोगों से आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ लेने की अपील भी की।

दीवारों में दरारें देख चिंतित हैं स्थानीय लोग
दूसरी ओर स्थानीय निवासियों का कहना है कि भवन के कई हिस्सों में अब भी दरारें दिखाई देती हैं। उनका मानना है कि पूरी तरह नया भवन तैयार होने तक मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, यह भवन वर्षों पुराना है। पहले भी इसके हिस्से टूटकर गिर चुके हैं। ऐसे में लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से चिंता बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंधी और बारिश के दौरान आसपास रहने वाले परिवारों को भी भवन की स्थिति को लेकर डर बना रहता है।
25 बेड के अस्पताल के प्रस्ताव पर टिकी उम्मीदें
जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने भवन के पुनर्निर्माण और 25 बेड के आधुनिक आयुर्वेदिक अस्पताल के विकास का प्रस्ताव शासन को भेजा है। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि इस सरकारी संपत्ति का समुचित विकास किया जाए तो यह वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र बन सकता है।

सुरक्षा और सुविधाओं के बीच संतुलन की चुनौती
फिलहाल आयुर्वेदिक चिकित्सालय की सेवाएं पुराने भवन में जारी हैं। प्रशासन का दावा है कि मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि स्थानीय लोग भवन की स्थिति को लेकर आशंकित हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रस्तावित नए अस्पताल और भवन के निर्माण को कब मंजूरी मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
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