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शालीमार बाग में बुलडोजर कार्रवाई पर बवाल, बेघर हुए परिवारों का फूटा गुस्सा
नई दिल्ली। शालीमार बाग क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए चल रही बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। कार्रवाई के दौरान कई मकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद प्रभावित परिवारों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना उचित पुनर्वास और मुआवजे के उन्हें बेघर किया जा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुरूप की जा रही है।
छावनी में तब्दील हुआ इलाका
कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके को पूरी तरह छावनी में बदल दिया गया है और न केवल आम लोगों बल्कि कई मीडिया कर्मियों को भी प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी है, तो मीडिया की पहुंच पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया।
‘अवैध’ मकानों पर उठे सवाल
प्रभावित परिवारों का कहना है कि जिन मकानों को अवैध बताकर तोड़ा जा रहा है, उनके लिए वर्षों पहले रजिस्ट्री और अन्य सरकारी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं। लोगों का तर्क है कि यदि संपत्तियां अवैध थीं, तो संबंधित दस्तावेजों को स्वीकृति कैसे मिली और सरकार ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की।
निशानदेही से आगे तोड़फोड़ का आरोप
कई निवासियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर भी मकानों को नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि जिन हिस्सों पर निशान नहीं लगाए गए थे, उन्हें भी बुलडोजर की कार्रवाई में तोड़ दिया गया।
हजारों लोगों के सामने आवास का संकट
कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है। कई परिवारों ने बढ़ते किराए और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज
कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए वादों और वर्तमान स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है। वहीं कुछ लोगों ने पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में प्रवेश को नियंत्रित किया गया है।
पुनर्वास और पारदर्शिता की मांग
प्रभावित परिवारों की मांग है कि सरकार उन्हें उचित मुआवजा, वैकल्पिक आवास और स्पष्ट पुनर्वास योजना उपलब्ध कराए। साथ ही उन्होंने कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और मीडिया को स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग की अनुमति देने की मांग भी की है।

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