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ईद से पहले वाराणसी में बकरा मंडी सील: तपती गर्मी में ताले के पीछे बंद हुए 2,000 जानवर, रो पड़े व्यापारी
वाराणसी। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ईद-उल-अजहा से ठीक दो दिन पहले एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। शहर के ऐतिहासिक बेनियाबाग मैदान में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वैध टेंडर पर लगी सबसे बड़ी बकरा मंडी को नगर निगम और स्थानीय पुलिस ने अचानक ताला लगाकर सील कर दिया। सोमवार सुबह 11:00 बजे भारी पुलिस बल और दशमेश थाना प्रभारी के साथ पहुंची नगर निगम की टीम ने मंडी के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और व्यापारियों को महज आधे घंटे में जगह खाली करने का फरमान सुना दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से मंडी के अंदर लगभग 2,000 जानवर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों छोटे व्यापारी फंस गए हैं।
परमिशन कैंसिल” का हवाला, पर्दा डालकर मीडिया को रोकने की कोशिश
मंडी के संचालकों और व्यापारियों के अनुसार, उन्हें अचानक बताया गया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर मंडी की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। जब मीडिया की टीम ग्राउंड रियलिटी दिखाने मौके पर पहुंची, तो प्रशासन और कुछ लोगों द्वारा मुख्य गेट पर हरा पर्दा डालकर अंदर की बदहाली को छुपाने और मीडिया से दूरी बनाने की भी कोशिश की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंडी यहां दशकों से पारंपरिक रूप से लगती आ रही है। चर्चा है कि कुछ संगठनों द्वारा “बाबा की नगरी में बकरा मंडी” को लेकर शिकायत की गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने बैकफुट पर आते ही यह कदम उठाया।
48° की जानलेवा गर्मी में तड़प रहे जानवर, 3 बकरों की मौत
पार्क के भीतर फंसे आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, सोनभद्र और लखनऊ से आए व्यापारियों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 45° से 48° के बीच झुलसा देने वाले तापमान में गेट बंद होने के कारण न तो जानवरों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था हो पा रही है और न ही कोई खरीदार अंदर आ पा रहा है। व्यापारियों ने रोते हुए बताया कि अब तक भूख, प्यास और भयंकर उमस के कारण दो से तीन महंगे बकरों की तड़पकर मौत हो चुकी है। प्रत्येक बकरे की
कीमत ₹15,000 से ₹20,000 के बीच थी।
कर्ज लेकर माल खरीदा था, अब कहां जाएं?
मंडी में अपने 15 जानवरों के साथ फंसे आजमगढ़ (मुबारकपुर) के एक छोटे व्यापारी ने सुबकते हुए कहा, हम गरीब लोग हैं। कोई ₹5 लाख तो कोई ₹6 लाख का कर्ज लेकर बकरा ईद के बाजार के भरोसे माल खरीदकर लाया था। प्रशासन ने अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के हमारे पेट पर लात मार दी है। अब हम इस माल को वापस गांव लेकर भी नहीं जा सकते और सालभर इन्हें खिलाने की हमारी हैसियत नहीं है।
व्यापारियों के समर्थन में आए एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि प्रशासन को यदि परमिशन रद्द ही करनी थी, तो कम से कम 24 घंटे का समय देना चाहिए था ताकि गाड़ियां बुलाकर जानवरों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता। इस भीषण गर्मी में बिना पानी के जानवर और इंसान दोनों दम तोड़ देंगे।

टेंडर के खेल और प्रशासनिक रवैए पर गंभीर सवाल
व्यापारियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इस स्थान पर बकरा मंडी का संचालन प्रतिबंधित था, तो नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रशासन ने इसके लिए 10 दिनों का बकायदा टेंडर क्यों जारी किया? 7 दिनों तक शांतिपूर्वक बाजार चलने के बाद त्योहार से ठीक दो दिन पहले अचानक टेंडर निरस्त करना प्रशासनिक विफलता और तानाशाही को दर्शाता है।
अब कड़े प्रशासनिक पहरे के बीच करोड़ों रुपये के माल और बेजुबान जानवरों की जिंदगी दांव पर लगी है। रोते-बिलखते व्यापारियों के पास अब सिर्फ दो ही रास्ते नजर आ रहे हैं या तो वे कर्ज के बोझ तले खुद अपनी जान दे दें या फिर इस तपती धूप में अपने जानवरों को मरता हुआ देखें। इस हृदयविदारक घटना के बाद अब तक नगर निगम के किसी आला अधिकारी ने इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या व्यापारियों के पुनर्वास की योजना पेश नहीं की है।
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