Connect with us

देश

ऑन रिकॉर्ड ‘चमकती’ व्यवस्था, ज़मीन पर जर्जर ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स: ग्रेटर नोएडा की ‘अफोर्डेबल सोसाइटी’ बनी हादसों का घर

Published

on

WhatsApp Image 2026 05 19 at 15.11.48

ग्रेटर नोएडा। यात्रीगण अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें, रेलवे का यह पुराना नारा ग्रेटर नोएडा के बीटा-1 स्थित ईडब्ल्यूएस (अफोर्डेबल सोसाइटी) के निवासियों की ज़िंदगी का कड़वा सच बन चुका है। चुनाव के समय गरीबों के घर तक दौड़ लगाने वाले नेताओं और करोड़ों के बजट का दावा करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने इस सोसाइटी को पूरी तरह रामभरोसे छोड़ दिया है। वर्ष 2009 में मायावती सरकार के कार्यकाल में गरीबों के लिए आवंटित हुए इन फ्लैट्स की हालत आज इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहाँ रहना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा है।

कागज़ों पर ऑन, हकीकत में ‘नीलबटा सन्नाटा’

सोसाइटी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खेल यहाँ के ‘पंप हाउस’ में देखने को मिलता है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के ऑन-रिकॉर्ड यह अंडरग्राउंड वाटर सीवेज टैंक और पंप हाउस पूरी तरह चालू है। इसके नाम पर बजट पास हो रहा है, बिजली का काम दर्ज है और कथित तौर पर यहाँ गार्ड भी तैनात है, जिसकी सैलरी भी निकल रही है।
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि पंप हाउस के कमरे में न तो कोई मोटर है, न पंप और न ही बिजली का कोई बटन। चारों तरफ सिर्फ कूड़ा और गंदगी का अंबार लगा है। साल 2012 से यहाँ रह रहे निवासी आज 14 साल बाद भी पानी और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कागज़ों पर पैसा निकल रहा है, लेकिन धरातल पर व्यवस्था के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार की नींव खड़ी है।

दीवारों से आर-पार दिखती हैं ईंटें, बच्चों के सिर पर मंडरा रहा खतरा

सोसाइटी में हर तरफ इमारतों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। छतों और दीवारों का सीमेंट इस कदर झड़ चुका है कि जंग लगी लोहे की सरियाँ साफ बाहर दिखाई दे रही हैं। स्थानीय निवासी अजय शर्मा, जो यहाँ 2011 से रह रहे बताते हैं, स्थिति इतनी जर्जर है कि लगता नहीं यह इमारत दो-चार साल भी टिक पाएगी। यहाँ 2 से 10 साल के छोटे-छोटे बच्चे खेलते रहते हैं। अगर किसी बच्चे पर यह भारी प्लास्टर गिर गया और कोई अनहोनी हो गई, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन या कोई नेता इसकी जिम्मेदारी उठाएगा?

सीपेज और वॉटर लॉगिंग से नारकीय हुआ जीवन

सोसाइटी के भीतर सीवर के चेंबर पूरी तरह ब्लॉक होकर ओवरफ्लो हो रहे हैं। नालियों की सफाई न होने से जगह-जगह वॉटर लॉगिंग हो रही है। गंदगी के कारण चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियाँ और घास-फूस उग आए हैं। घरों के अंदर इस कदर सीपेज (सीलन) है कि लोगों का अपने ही कमरों में सोना दूभर हो गया है। इमारतों की सीढ़ियाँ तक टूट कर गिर चुकी हैं।

हम गरीब हैं, 1.20 करोड़ का मेंटेनेंस कहाँ से लाएँ?

जब निवासियों ने इस बदहाली के खिलाफ ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में शिकायत की और मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर गुहार लगाई, तो अधिकारियों ने सीधे हाथ खड़े कर लिए। अथॉरिटी का कहना है कि पजेशन देने के बाद मरम्मत की जिम्मेदारी आवंटियों की है।
इस पर सोसाइटी के एक अन्य निवासी ने दर्द बयां करते हुए कहा, यह ईडब्ल्यूएस सोसाइटी है। यहाँ कोई रेहड़ी-पटरी लगाने वाला रहता है, तो कोई घरों में काम करने वाला मजदूर। हमने पूरी सोसाइटी के रिपेयर का एक एस्टीमेट करवाया, तो करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट आ रहा है। कुल 128 फ्लैट हैं। आप ही सोचिए, जो गरीब 30 मीटर के इस फ्लैट में रहने को मजबूर है, वो लाखों रुपये का मेंटेनेंस कहाँ से लाएगा? अगर यह फ्लैट किसी अमीर या रसूखदार का होता, तो अथॉरिटी एक महीने में इसे चमका देती।

जनहित के सुलगते सवाल

भ्रष्टाचार की जाँच कब? जो पंप हाउस और गार्ड सिर्फ कागज़ों पर चल रहे हैं और जिनके नाम पर सरकारी धन का आहरण हो रहा है, उस भ्रष्टाचार पर अथॉरिटी कब संज्ञान लेगी?

अथॉरिटी की नैतिक जिम्मेदारी कहाँ? क्या सिर्फ पजेशन दे देने से सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? क्या किसी बड़े हादसे (इमारत गिरने) के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी?
गरीबों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों? वीआईपी सोसाइटियों में त्वरित कार्रवाई करने वाली ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी इन 128 गरीब परिवारों को नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर क्यों छोड़ रही है?

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Advertisement

Trending

Copyright © 2025 Batangarh. Designed by ❤️ TrafficRaid.com