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‘जादुई कंटेनर’ या सरकारी लापरवाही? औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों के ठीक सामने खुला शराब का ठेका, काम ठप और महिलाएं असुरक्षित
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक क्षेत्रों में कानूनन और सुरक्षा के लिहाज से शराब की दुकानों को फैक्ट्रियों से एक निश्चित दूरी पर रखने के नियम हैं। लेकिन ग्रेटर नोएडा के पैराडाइज चौक के पास इन नियमों को ताक पर रखकर फैक्ट्रियों के ठीक सामने शराब का एक विशालकाय कंटेनर लाकर खड़ा कर दिया गया है। करीब एक हफ्ते से इस ‘जादुई कंटेनर’ के यहां आने के बाद से पूरे इलाके का औद्योगिक माहौल पूरी तरह खराब हो चुका है। कंपनियों के उत्पादन पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही रात की पाली में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई है।
15 अप्रैल को खुला, विरोध हुआ तो रास्ता बदला
जानकारी के अनुसार, यह ठेका इसी वर्ष 15 अप्रैल को पैराडाइज चौक के पास खोला गया था। शुरुआत में यह कुछ झुग्गी-झोपड़ियों के पास स्थित था, जहां स्थानीय महिलाओं और निवासियों ने भारी हंगामा और धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस के कथित हस्तक्षेप से इस कंटेनर को वहां से हटाकर चुपचाप इस औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियों के ठीक सामने लाकर खड़ा कर दिया गया। कंपनियों के प्रबंधकों का कहना है कि वे रातों-रात आए इस ठेके को देखकर हैरान रह गए।
80% लेबर नशे में, कंपनियों का प्रोडक्शन और डिस्पैच ठप
फैक्ट्री मालिकों और प्रोडक्शन मैनेजरों का दर्द अब सीधे तौर पर सामने आ रहा है। एक कंपनी के प्रोडक्शन हेड ने बताया, जब से यह ठेका हमारे ठीक सामने आया है, तब से हमारे लगभग 80% श्रमिक दोपहर के लंच टाइम या सुबह आते ही शराब पी लेते हैं। चेकिंग के दौरान कई लोग पकड़े भी जा रहे हैं। श्रमिक अब शाम को ओवरटाइम करने से मना कर देते हैं। हमारे यहां अनुपस्थिति अचानक बहुत बढ़ गई है, जिससे हम समय पर ऑर्डर्स की डिलीवरी नहीं कर पा रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में भारी मशीनों के बीच नशे में धुत होकर काम करना श्रमिकों की जान के लिए भी एक बड़ा जोखिम बन गया है।
महिला कर्मी असुरक्षित, रात को सिक्योरिटी गार्ड्स से बदसलूकी
इस अवैध स्थिति का सबसे बुरा असर सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। कंपनियों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए शाम के समय यहां से निकलना बेहद असहज और डरावना हो गया है।
एक अन्य कंपनी के अधिकारी ने सुरक्षा चिंताओं को जाहिर करते हुए कहा, शाम के वक्त यहां पियक्कड़ों की भारी भीड़ जुट जाती है जिससे ट्रैफिक जाम होता है। हमारी फैक्ट्रियों में महिलाएं भी काम करती हैं, जो शाम को निकलते वक्त बेहद अनकंफर्टेबल महसूस करती हैं। हद तो तब हो जाती है जब रात को शराब पीकर बाहरी लोग हमारी कंपनी के गेट पर आकर सिक्योरिटी गार्ड्स को धमकाते हैं कि ‘गेट खोल, हमें पानी दे।’ हमारा अकेला गार्ड रात में डरा रहता है।

सेल्समैन की दलील: लाइसेंस हमारे पास है, सरकार से बात करो’
जब ग्राउंड जीरो पर ठेके के सेल्समैन से इस अव्यवस्था पर सवाल किया गया, तो उसने साफ पल्ला झाड़ते हुए कहा, हमें एक्साइज विभाग से पैराडाइज चौक की लोकेशन का परमिट मिला हुआ है। चौराहे से 100-200 मीटर आगे-पीछे हम इसे रख सकते हैं। हमारे पास लाइसेंस है, यह सरकारी मंजूरी के बाद ही आया है। अगर वर्कर पीकर कंपनियों में उत्पात मचा रहे हैं, तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। इसके लिए आप सरकार से बात कीजिए।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस कंटेनर पर किसी भी अधिकृत दुकान की तरह कोई परमानेंट एड्रेस या सरकारी बोर्ड नहीं लिखा है, सिर्फ शराब की दरें लिखी हुई हैं।
बेबसी का आलम, शिकायत करें तो किससे?
कंपनी प्रबंधकों का कहना है कि वे इस मामले में शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर इस ‘अस्थाई’ कंटेनर की शिकायत किससे की जाए, क्योंकि इसकी कोई फिक्स लोकेशन ही नहीं है। पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
हमारा नजरिया: यदि औद्योगिक क्षेत्रों के प्रवेश द्वारों और फैक्ट्रियों के ठीक सामने ही शराब परोसी जाएगी, तो देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और औद्योगिक सुरक्षा के दावे केवल कागजी बनकर रह जाएंगे। आबकारी विभाग को तुरंत संज्ञान लेकर इस संवेदनशील क्षेत्र से ठेके को हटाना चाहिए।

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