Connect with us

देश

लुटियंस दिल्ली के ‘मस्जिद कैंप’ पर टूटा दुखों का पहाड़: 30 मई से पहले खाली करना होगा आशियाना, 75 साल पुरानी बस्ती पर चलेगा दिल्ली सरकार का बुलडोजर

Published

on

WhatsApp Image 2026 05 18 at 15.34.40

नई दिल्ली। देश के सबसे सुरक्षित और अति-विशिष्ट माने जाने वाले इलाके लुटियंस दिल्ली के ‘लोक कल्याण मार्ग’ के ठीक पीछे स्थित ‘मस्जिद कैंप’ जेजे बस्ती में इन दिनों मातम पसरा हुआ है। दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण के संयुक्त नोटिस ने यहां रह रहे सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। नोटिस के मुताबिक, इस पूरी बस्ती को 30 मई से पहले खाली करना है और आगामी 21 से 26 मई के बीच यहां भारी प्रशासनिक मुस्तैदी के साथ बुलडोजर एक्शन होना तय हो गया है। तीन पीढ़ियों से यहां रह रहे लोग अचानक बेघर होने की कगार पर हैं और पूरी बस्ती में खौफ व बेबसी का माहौल है।

कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, 75 साल का आशियाना चंद दिनों में होगा जमींदोज

मस्जिद कैंप के निवासियों ने इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। एक स्थानीय युवक ने रोते हुए बताया, “हमने कोर्ट में गुहार लगाई थी, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें महज 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। पुलिस और प्रशासन के लोग लगातार आकर घर खाली करने का दबाव बना रहे हैं। हमारी पूरी जिंदगी, हमारा बचपन और हमारे बुजुर्गों की यादें इसी मिट्टी में दफन हैं। 26 मई को यहां सब कुछ मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा।

गेवरा बॉर्डर पर न स्कूल है, न रोजगार

दिल्ली सरकार की ओर से विस्थापित होने वाले इन परिवारों को दिल्ली के सुदूर बॉर्डर इलाके ‘गेवरा’ में फ्लैट आवंटित किए जा रहे हैं, लेकिन निवासी इसे किसी बड़ी सजा से कम नहीं मान रहे हैं।
दूरी और परिवहन की मार: गेवरा बॉर्डर यहां से लगभग 45 किलोमीटर दूर है। निवासियों का कहना है कि वहां से मुख्य दिल्ली आने-जाने में ही रोजाना 4 घंटे बर्बाद हो जाएंगे।

रोजी-रोटी का संकट: बस्ती के अधिकांश लोग पास के रेस कोर्स, स्कूलों और एयरफोर्स स्टेशन के भीतर मजदूरी या छोटे-मोटे काम करते हैं। एक 64 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया, मैं ईंट-गारा का काम करता हूं। 45 किलोमीटर दूर जाकर मैं सुबह 9 बजे काम पर कैसे पहुंच पाऊंगा? वहां रोजगार के नाम पर फैक्ट्रियों में 8-9 हजार रुपये की दिहाड़ी है, जिससे पांच सदस्यों के परिवार का पेट नहीं पल सकता।

शिक्षा और सुरक्षा पर सवाल: स्थानीय महिलाओं के अनुसार, गेवरा में न तो बच्चों के लिए अच्छे स्कूल-कॉलेज हैं और न ही कोई बड़ा अस्पताल। लोगों का आरोप है कि वह इलाका असुरक्षित है, जहां रोजगार न होने के कारण अपराध पनपने का खतरा है।

26 को बेटी का कॉलेज का पेपर है, हम घर संभालें या उसका भविष्य?

मस्जिद कैंप की तंग गलियों में दो कमरों के छोटे से मकान में रहने वाली एक महिला ने अपने घर की स्थिति दिखाते हुए कहा, मैं और मेरे पति दोनों काम पर जाते हैं। यहां हमारी तीन बेटियां पूरी तरह सुरक्षित माहौल में रहती और पढ़ती हैं। मेरी बड़ी बेटी का 26 मई को कॉलेज का पेपर है। आप ही बताइए, उस दिन हम अपना सामान समेटकर सड़क पर आएं या अपनी बेटी को परीक्षा दिलाने भेजें? अगर सरकार को हमें हटाना ही था, तो जब हम बस रहे थे तभी क्यों नहीं रोका?

सुरक्षा कारणों के दावों पर उठे सवाल

इस कार्रवाई के पीछे सुरक्षा कारणों और एयरफोर्स क्षेत्र से नजदीकी का हवाला भी दिया जा रहा है। हालांकि, दशकों से यहां रह रहे 64 वर्षीय बुजुर्ग ने इस पर तीखा ऐतराज जताते हुए कहा, मैं इस उम्र तक यहीं रहा हूं। आज तक कभी एयरफोर्स को हमसे कोई दिक्कत नहीं हुई। न जाने आज अचानक सरकार कैसे जाग गई और हमारे आशियानों को अवैध बताने लगी।

सिस्टम से सुलगते सवाल

कांग्रेस का राज भी देखा और आज का राज भी देख रहे हैं। गरीबों के घर उजाड़ कर कौन सा विकास हो रहा है? ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाले कभी आकर देखें कि हमारी बेटियां किस डर में जी रही हैं। जिनके पास नोट हैं, उनका सब कुछ वैध है; हम गरीबों को सिर्फ तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है।

काश! पास में ही मिल जाता आशियाना

प्रशासनिक नोटिसों से पटी इस बस्ती की हर दीवार आज चीख-चीख कर अपनी बेबसी बयां कर रही है। निवासियों की सरकार से सिर्फ इतनी ही अंतिम अपील है कि यदि उन्हें यहां से हटाना अनिवार्य ही है, तो उन्हें 45 किलोमीटर दूर फेंकने के बजाय इसी इलाके के आसपास कहीं पुनर्वासित किया जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और उनकी रोजी-रोटी न छिड़े। बहरहाल, 26 मई की तारीख नजदीक आ रही है, और देखना यह होगा कि दिल्ली की इस व्यवस्था में गरीबों की इस चीख को कोई सुनने वाला मिलता है या कानून के हंटर के आगे यह आशियाने हमेशा के लिए जमींदोज हो जाते हैं।

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Advertisement

Trending

Copyright © 2025 Batangarh. Designed by ❤️ TrafficRaid.com