देश
महंगाई और कम किराए की दोहरी मार, तीन दिवसीय ऑटो-टैक्सी हड़ताल
नई दिल्ली। देश की राजधानी में सीएनजी, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा के सामानों की बढ़ती कीमतों के विरोध में ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने 21, 22 और 23 तारीख को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। हालांकि, इस हड़ताल का असर मिला-जुला देखने को मिल रहा है। आनंद विहार रेलवे स्टेशन के पास जमीनी हकीकत जानने पर पता चला कि ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच हड़ताल को लेकर असमंजस की स्थिति है। कुछ चालक अपनी जायज मांगों के लिए गाड़ियां खड़ी करने को तैयार हैं, तो कुछ का कहना है कि अगर वे तीन दिन सड़क पर नहीं उतरेंगे, तो उनके बच्चे भूखे मर जाएंगे।
पिछले 15 सालों से मार, पर किराया जस का तस
चालकों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि पिछले डेढ़ दशक में सीएनजी और पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं, लेकिन उनके आधिकारिक किराए में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है।
विशेष रूप से ओला और उबर जैसी ऐप-आधारित कंपनियों से जुड़े कैब और बाइक-टैक्सी चालकों में भारी असंतोष है। चालकों के अनुसार, कंपनियां उन्हें मात्र ₹10 प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान कर रही हैं, जिसमें से करीब 16% हिस्सा कंपनी खुद रख लेती है। चालकों की मांग है कि इस भीषण महंगाई को देखते हुए किराए को बढ़ाकर कम से कम ₹15 से ₹18 प्रति किलोमीटर किया जाना चाहिए।

हड़ताल मजबूरी है, पर रोज कुआं खोदना और रोज पानी पीना
आनंद विहार पर मौजूद ऑटो चालक सौरभ गुप्ता ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, हाल ही में सीएनजी पर फिर पैसे बढ़ गए। एक तरफ महंगाई है और दूसरी तरफ सरकार ने स्टेशनों पर नया टैक्स लगा दिया है। पहले कोई टैक्स नहीं लगता था, अब अगर दिन में 10 बार स्टेशन आते हैं, तो ₹350 प्रति दिन का रजिस्ट्रेशन या सवारी टैक्स लग जाता है। ऐसे में हम कैसे जिएंगे?
वहीं, एक अन्य चालक ने हड़ताल के पूरी तरह सफल न होने का कारण बताते हुए कहा कि हर चालक की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती। कुछ के पास दो-तीन दिन का राशन होता है, लेकिन जो रोज कमाकर शाम का चूल्हा जलाते हैं, वे चाहकर भी हड़ताल नहीं कर सकते। संगठन में एकजुटता की कमी का फायदा आखिरकार सरकारें उठाती हैं।
वादे और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर
चुनाव के समय गली-गली घूमने वाले जन प्रतिनिधियों के प्रति जनता का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। चालकों ने पिछली आम आदमी पार्टी सरकार और मौजूदा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने दो-दो बार ऑटो चालकों और मजदूरों के खातों में ₹5000 भेजकर उनकी परेशानी समझी थी।
चालकों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है। आश्रम से बदरपुर और अरविंदो मार्ग से मेहरौली तक हर जगह जनता जाम से जूझ रही है, और अधिकारी व नेता अपनी सुख-सुविधाओं में व्यस्त हैं।
आनंद विहार स्टेशन पर ‘रेल नीर’ की ब्लैक मार्केटिंग और अवैध वसूली
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान रेलवे स्टेशन के पास एक और बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया। ऐप-आधारित बाइक टैक्सी चलाने वाले एक युवक ने बताया कि कड़ी धूप में 20-30 राइड पूरी करने के बाद जो इंसेंटिव मिलता है, वह भी रास्ते के खर्चों में चला जाता है।
भ्रष्टाचार का लाइव प्रमाण: स्टेशन के वेंडर्स द्वारा ₹14-₹15 प्रिंट रेट वाली सरकारी ‘रेल नीर’ की पानी की बोतल को चालकों और यात्रियों को ₹20 में जबरन बेचा जा रहा है। इसके अलावा, आनंद विहार में टू-व्हीलर्स से भी ₹20 की अवैध पार्किंग पर्ची काटी जा रही है, जबकि दिल्ली में अन्य जगहों पर ऐसा कोई नियम नहीं है। चालकों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस वेंडर घोटाले और अवैध वसूली पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है।

जनता और सरकार के लिए चेतावनी
यह हड़ताल भले ही आंशिक रूप से चल रही हो, लेकिन चालकों की पीड़ा बेहद गंभीर और वास्तविक है। दूध, ब्रेड, सब्जी और ईंधन के दाम बढ़ने से केवल चालक ही नहीं, बल्कि आम जनता भी पिस रही है। जब माल ढोने का किराया महंगा होगा, तो मंडियों से आने वाली सब्जियां भी आम आदमी की थाली से दूर हो जाएंगी। अब देखना यह है कि दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग इन चालकों की मांगों पर कब तक नया किराया चार्ट लागू करता है, ताकि यात्रियों और चालकों दोनों को राहत मिल सके।

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