देश
नीट धांधली पर छात्रों का ‘महा-आक्रोश’, काशी विद्यापीठ के द्वार पर फूंका NTA का पुतला
वाराणसी | देशभर में नीट परीक्षा को लेकर मचे घमासान के बीच प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विरोध की आग तेज हो गई है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मुख्य द्वार पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। छात्रों ने एजेंसी का पुतला फूंका और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सांकेतिक रूप से पुतले की जूतों से पिटाई भी की।
लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि एनटीए अब अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो चुका है। छात्रों ने आरोप लगाया कि साल भर की मेहनत, लाखों की फीस और माता-पिता की उम्मीदों पर पेपर लीक और धांधली ने पानी फेर दिया है। 23 लाख विद्यार्थियों का भविष्य आज खतरे में है। गांव-गरीब के बच्चे पेट काटकर तैयारी करते हैं और अंत में पता चलता है कि पेपर बिक चुका है। यह छात्रों के भविष्य के साथ सरासर डकैती है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं:
NTA की बर्खास्तगी: बार-बार पेपर लीक की घटनाओं को देखते हुए इस एजेंसी को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए।
CBI जांच: राजस्थान और अन्य राज्यों में हुई धांधली की गहन सीबीआई जांच हो और दोषियों को कठोरतम सजा मिले।
निदेशक का इस्तीफा: NTA के डायरेक्टर को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए या उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए।
प्रवेश नियमों में ढील: छात्रों ने मांग की कि ट्रैफिक और अन्य कारणों से लेट होने वाले छात्रों को कम से कम 15 मिनट की अतिरिक्त सहूलियत दी जाए।
प्रधानमंत्री के क्षेत्र से दिया संदेश
छात्रों ने कहा कि वे काशी से प्रधानमंत्री को यह संदेश देना चाहते हैं कि छात्र हित का हनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि मांगे नहीं मानी गईं और भविष्य में फिर ऐसी लापरवाही हुई, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा।
फिलहाल, छात्रों की मांग है कि जो भी आगामी परीक्षाएं हों, वे पूरी शुचिता और पारदर्शिता के साथ कराई जाएं ताकि किसी भी मेधावी छात्र का मनोबल न टूटे। अब देखना यह है कि छात्र शक्ति के इस आक्रोश पर केंद्र सरकार और एनटीए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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