देश
डंपिंग यार्ड से उठती बदबू और बीमारी के बीच घुट रही लाखों लोगों की जिंदगी
मथुरा। कृष्ण जन्मभूमि और धार्मिक आस्था के बीच अब एक और पहचान तेजी से उभर रही है‘कचरे का पर्वत’। मथुरा के नगला कोलू क्षेत्र स्थित डंपिंग यार्ड को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि इस डंपिंग यार्ड से निकलने वाली जहरीली बदबू, धुआं और गैसों के कारण आसपास की लाखों आबादी बीमारियों की चपेट में आ रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई वर्षों से यह डंपिंग यार्ड लगातार फैलता जा रहा है। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक यहां रहने वाले लोग कैंसर, अस्थमा, त्वचा रोग और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण की जांच और आदेशों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, एनजीटी की टीम ने पूर्व में निरीक्षण कर इस स्थान को “नरक कुंड” जैसी स्थिति वाला क्षेत्र बताया था। जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी इलाके में स्वास्थ्य परीक्षण किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग बीमार पाए गए थे। स्थानीय लोगों का दावा है कि रिपोर्ट में डंपिंग यार्ड से होने वाले प्रदूषण को बीमारी की एक बड़ी वजह माना गया था।
सालों में हटाने का आदेश, लेकिन सात साल बाद भी हालात जस के तस
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि एनजीटी ने डंपिंग यार्ड को एक वर्ष के भीतर हटाकर वहां हरित क्षेत्र और पार्क विकसित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन कई साल गुजर जाने के बाद भी कचरे का पहाड़ खत्म नहीं हुआ। उल्टा, अब मथुरा के साथ-साथ वृंदावन और अन्य क्षेत्रों का कचरा भी यहां डाला जा रहा है।

लोगों का आरोप है कि नगर निगम और प्रशासन बार-बार
कागजों में निस्तारण के दावे करते हैं, जबकि जमीनी स्थिति बिल्कुल अलग है। डंपिंग यार्ड में अक्सर मीथेन गैस बनने से आग लगने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई बार महीनों तक आग सुलगती रही, जिससे जहरीला धुआं पूरे इलाके में फैलता रहा।
सांसद और प्रशासन पर उठे सवाल
क्षेत्र के लोगों ने मथुरा से सांसद हेमा मालिनी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव के समय जनसंपर्क और प्रचार तो दिखाई देता है, लेकिन क्षेत्र की सबसे बड़ी पर्यावरणीय और स्वास्थ्य समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी समस्या की गंभीरता को नजरअंदाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हालात इतने सामान्य हैं, तो फिर लोगों और मीडिया को डंपिंग यार्ड के भीतर जाने से क्यों रोका जाता है।

कृष्ण नगरी की छवि पर दाग
धार्मिक नगरी वृंदावन और मथुरा की पहचान देश-दुनिया में आस्था, यमुना और गोवर्धन पर्वत से जुड़ी रही है। लेकिन स्थानीय लोग अब तंज कसते हुए कहते हैं कि यहां गोवर्धन पर्वत नहीं, कचरे का पर्वत खड़ा हो गया है।
इलाके के निवासियों ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते डंपिंग यार्ड का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि डंपिंग यार्ड को आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाए, पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच शिविर तथा पर्यावरणीय अध्ययन कराए जाएं।
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