देश
किसान-मजदूर मुद्दों पर नोएडा में गरमाया माहौल, भ्रष्टाचार और कम वेतन को लेकर उठी आवाज
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध नगर में किसान संगठनों का विरोध तेज हो गया है। भारतीय किसान यूनियन (भगत सिंह) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन भाटी ने आरोप लगाया कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में किसानों की जमीनें सर्किल रेट से कम कीमत पर अधिग्रहित की गईं, जबकि बाद में इन्हें बिल्डरों को ऊंचे दामों पर बेचा गया। उनका कहना है कि कुछ तथाकथित किसान संगठन किसानों के हित में काम करने के बजाय अफसरों से सांठगांठ कर निजी लाभ उठा रहे हैं।
प्रदर्शन और हिंसा पर उठे सवाल
हालिया प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ और आगजनी को लेकर भी यूनियन ने सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि एक सामान्य मजदूर ऐसी घटनाओं में शामिल नहीं हो सकता और यह सब एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कुछ राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी संदेह जताया है।
मजदूरों की सैलरी और ओवरटाइम का मुद्दा
संगठन ने मजदूरों की कम सैलरी को बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना है कि वर्तमान में ₹11,000 से ₹15,000 तक वेतन पाने वाले मजदूरों के लिए गुजारा करना मुश्किल है। यूनियन ने न्यूनतम वेतन कम से कम ₹20,000 करने और ओवरटाइम का भुगतान ₹120–₹150 प्रति घंटा तय करने की मांग रखी है, ताकि मजदूर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
वेतन असमानता पर सवाल

यूनियन नेताओं ने सरकारी और निजी क्षेत्र के वेतन में भारी अंतर को भी मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि जहां सरकारी कर्मचारियों को ₹1 लाख से ₹2 लाख तक वेतन मिल रहा है, वहीं मेहनत करने वाले मजदूरों को बेहद कम भुगतान किया जा रहा है, जो सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को दर्शाता है।
प्रशासन से समाधान की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से अपील की है कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं का पारदर्शी और समयबद्ध समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों का रवैया संवेदनशील और जवाबदेह होगा, तो धरना-प्रदर्शन की स्थिति अपने आप समाप्त हो सकती है।
यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन का दावा है कि उनके पास बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हैं और वे भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार हैं।
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