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‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ क्या है ? केंद्र ने जारी किया आधिकारिक नोटिफिकेशन
नई दिल्ली | भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। संसद के दोनों सदनों में गहन चर्चा और भारी बहुमत से पारित होने के बाद, अब यह कानून देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का चेहरा बदलने के लिए तैयार है।
क्या है इस कानून का मुख्य उद्देश्य?
इस कानून का प्राथमिक लक्ष्य विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। अब तक भारतीय राजनीति में महिलाओं की उपस्थिति जनसंख्या के अनुपात में काफी कम रही है, जिसे सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है।
प्रमुख विशेषताएं और प्रभाव
कानून के लागू होने से भविष्य की चुनावी राजनीति में निम्नलिखित बदलाव आएंगे:
33% आरक्षण: लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित होंगी।
कोटे के भीतर कोटा: एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों में से ही 33% सीटें इसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
रोटेशन प्रणाली: आरक्षित सीटों को प्रत्येक परिसीमन अभ्यास के बाद रोटेट (बदला) किया जाएगा।
अवधि: यह आरक्षण वर्तमान में 15 वर्षों के लिए लागू होगा, जिसे संसद बाद में कानून बनाकर बढ़ा सकती है।
चुनौतियां: कब से मिलेगा वास्तविक लाभ?
भले ही नोटिफिकेशन जारी हो गया है, लेकिन धरातल पर इसे लागू होने में अभी कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं का इंतजार करना होगा। सरकार के अनुसार, यह आरक्षण निम्नलिखित दो चरणों के बाद प्रभावी होगा:
नई जनगणना: कानून के लागू होने के बाद पहली जनगणना (Census) का डेटा सार्वजनिक होना अनिवार्य है।
परिसीमन (Delimitation): जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण (परिसीमन) किया जाएगा। इसके बाद ही आरक्षित सीटों की पहचान की जाएगी।
विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि इन प्रक्रियाओं के कारण यह आरक्षण संभवतः 2029 के लोकसभा चुनावों से पूरी तरह प्रभावी हो पाएगा।
संसद में बहस और राजनीतिक घमासान
संसद में चर्चा के दौरान जहां विपक्षी दलों ने इस कदम का स्वागत किया, वहीं ‘ओबीसी (OBC) कोटे’ की मांग को लेकर तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्ष का तर्क है कि इस आरक्षण में पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए था। दूसरी ओर, सरकार ने इसे “महिला सशक्तिकरण का एक निस्वार्थ प्रयास” बताते हुए स्पष्ट किया कि यह बिना किसी भेदभाव के सभी महिलाओं को सशक्त बनाएगा।
आंकड़ों की जुबानी, वर्तमान स्थिति
वर्तमान लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या लगभग 15% के करीब है। नए अधिनियम के लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 181 हो जाएगी, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव होगा।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि आधी आबादी के राजनीतिक अधिकारों की उद्घोषणा है। अब देखना यह है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है ताकि देश की बेटियां नीति निर्धारण में अपनी निर्णायक भूमिका निभा सकें।
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