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जर्जर कांशीराम आवास में मौत, छज्जा गिरने से मजदूर की गई जान
वाराणसी। शिवपुर स्थित कांशीराम आवास की जर्जर इमारतें अब लोगों के लिए खतरा बन चुकी हैं। 20 अगस्त की शाम एक जर्जर छज्जा गिरने से दिहाड़ी मजदूर अन्ना नायक की मौत हो गई। हादसे के बाद कॉलोनी में लोगों का आक्रोश सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्ष 2012 के बाद से इमारतों की समुचित मरम्मत नहीं हुई। परिजनों के मुताबिक बारिश के बाद अन्ना नायक छत पर कपड़े देखने गए थे। इसी दौरान जर्जर छज्जा अचानक गिर गया और वह उसके साथ नीचे आ गिरे। अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं और मृतक ही घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे।
पहले भी हो चुके हैं हादसे

स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी में छज्जे और सीढ़ियों के हिस्से पहले भी गिर चुके हैं। पिछले साल भी एक बालकनी गिरने की घटना हुई थी। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई। कॉलोनी में जगह-जगह टूटी दीवारें, कमजोर छज्जे और जर्जर बालकनियां दिखाई देती हैं। लोगों को डर है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो फिर बड़ा हादसा हो सकता है।
बजट आया तो काम क्यों नहीं हुआ?
स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल है कि जर्जर हिस्सों की मरम्मत के लिए बजट जारी हुआ था या नहीं। यदि बजट आया था तो काम क्यों नहीं कराया गया? लोगों का कहना है कि अधिकारी जांच के लिए आते हैं, लेकिन इमारतों की वास्तविक स्थिति और मरम्मत की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया जाता। निवासियों के मुताबिक वे दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। ऐसे में अपनी जेब से इमारतों की मरम्मत कराना उनके लिए संभव नहीं है। उनका कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि आते हैं, लेकिन समस्या के समय कोई दिखाई नहीं देता।
मुआवजे और मरम्मत की मांग

मृतक के परिजनों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। परिवार का कहना है कि मृतक के जाने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल हो गया है। वहीं स्थानीय लोगों की मांग है कि कांशीराम आवास की सभी इमारतों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, जर्जर हिस्सों को तत्काल सुरक्षित किया जाए और जरूरी मरम्मत कराई जाए।
सवाल अब सिर्फ एक मजदूर की मौत का नहीं, बल्कि उन तमाम परिवारों की सुरक्षा का है, जो रोज इन जर्जर इमारतों के बीच अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।

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