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बच्चों के हाथ में कलम की जगह पेंट ब्रश, सरकारी स्कूल में पढ़ाई की जगह कराई जा रही पुताई
कानपुर। नगर के काकोरी-बिदू क्षेत्र स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में 15 अगस्त की तैयारियों के दौरान बच्चों से स्कूल की सफाई और पुताई कराने का मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में बच्चे रेलिंग पर पेंट करते, कक्षाओं की सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में जुटे नजर आए। बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी और कलम की जगह पेंट ब्रश दिखाई दिया। कई बच्चों के हाथों पर पेंट भी लगा हुआ था।
मामले ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और स्कूल प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन बच्चों का समय पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में लगना चाहिए, उनसे स्कूल की पुताई और सफाई क्यों कराई जा रही थी, यह बड़ा सवाल है।
15 अगस्त की तैयारी, लेकिन बच्चों से काम क्यों?

स्कूल प्रशासन की ओर से 15 अगस्त की तैयारियों का हवाला दिया गया। स्वतंत्रता दिवस से पहले स्कूलों में साफ-सफाई और सजावट की तैयारियां होती हैं, लेकिन सवाल यह है कि इसके लिए बच्चों को पुताई के काम में क्यों लगाया गया। यदि स्कूल की सफाई और पेंटिंग के लिए श्रमिकों या अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था है, तो बच्चों से यह काम कराने की जरूरत क्यों पड़ी? वहीं, यदि इस काम के लिए सरकारी स्तर पर बजट उपलब्ध कराया गया है, तो उसके इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जरूरत है। हालांकि, किसी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
जर्जर भवन ने भी बढ़ाई चिंता

स्कूल की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। भवन की कई दीवारों से पेंट उखड़ा हुआ दिखाई दिया। कुछ हिस्से जर्जर नजर आए और परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं दिखी। एक तरफ बच्चों से स्कूल की व्यवस्था सुधारने का काम कराया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर स्कूल भवन की हालत खुद सरकारी व्यवस्था की तस्वीर दिखाती नजर आई।
मीडिया के प्रवेश पर भी हुआ विवाद
मामले की रिपोर्टिंग के दौरान स्कूल प्रशासन की ओर से मीडिया के स्कूल परिसर में प्रवेश को लेकर सवाल उठाए गए और परमिशन दिखाने की बात कही गई। वहीं रिपोर्टिंग टीम का कहना था कि उसका उद्देश्य मौके की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। अब संबंधित शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि बच्चों से पुताई और सफाई क्यों कराई गई और स्कूल के रखरखाव के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
बच्चों के हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए या पेंट ब्रश? कानपुर के इस स्कूल की तस्वीरें सरकारी शिक्षा व्यवस्था से यही सवाल पूछ रही हैं।

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