देश
संघर्ष से पहचान तक, जब अभिनेता से आगे बढ़कर बने मदद की मिसाल
कुछ कहानियां इसलिए प्रेरणादायक नहीं होतीं कि उनमें सफलता जल्दी मिल जाती है, बल्कि इसलिए होती हैं क्योंकि इंसान मुश्किल रास्ते पर भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटता। अभिनेता सोनू सूद की कहानी भी ऐसी ही है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले एक युवा से लेकर फिल्मी पर्दे के चर्चित कलाकार और फिर जरूरतमंदों की मदद के लिए पहचाने जाने वाले चेहरे तक का उनका सफर कई पड़ावों से होकर गुजरा है।
इंजीनियर बनने निकले थे, अभिनेता बन गए
सोनू सूद का जन्म 30 जुलाई 1973 को पंजाब के मोगा में हुआ। उनके पिता शक्ति सागर सूद व्यवसाय से जुड़े थे, जबकि मां सरोज सूद शिक्षिका थीं। सोनू ने मोगा में स्कूली शिक्षा के बाद नागपुर के यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
लेकिन करियर की दिशा इंजीनियरिंग से अलग थी। अभिनय और मॉडलिंग में रुचि ने उन्हें मुंबई पहुंचाया। यहां उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी बिना किसी बड़े फिल्मी बैकग्राउंड के अपने लिए जगह बनाना।
छोटे मौके से बड़े पर्दे तक
सोनू सूद ने 1999 में तमिल फिल्म से अभिनय की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके अभिनय ने उन्हें पहचान दिलाई।
‘शहीद-ए-आजम’, ‘युवा’, ‘जोधा अकबर’, ‘सिंह इज़ किंग’, ‘दबंग’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘आर… राजकुमार’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’ और ‘सिंबा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा में स्थापित किया।
खास बात यह रही कि उन्होंने कई फिल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उन्हें अपने अभिनय की अलग पहचान बनाने में सफलता मिली। तेलुगु फिल्म ‘अरुंधति’ में उनके किरदार को विशेष सराहना मिली।
पर्दे का अभिनेता सड़क पर लोगों के बीच दिखा
सोनू सूद के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 2020 में आया। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान जब लाखों प्रवासी मजदूर अपने घर लौटने के लिए परेशान थे, तब सोनू सूद ने उनके लिए परिवहन और अन्य सहायता उपलब्ध कराने की पहल की।
यहीं से उनकी पहचान केवल अभिनेता तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर मदद की अपील करने वाले लोगों तक पहुंचने की कोशिश, चिकित्सा सहायता, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों में सहयोग ने उन्हें आम लोगों के बीच अलग पहचान दी।
उनके इस काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला और उन्हें UNDP का SDG Special Humanitarian Action Award प्रदान किया गया।
लोकप्रियता से ज्यादा जिम्मेदारी
सोनू सूद की कहानी का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उनकी लोकप्रियता किसी एक फिल्म या किरदार से नहीं, बल्कि संकट के समय लोगों के साथ खड़े होने से भी जुड़ी। हालांकि किसी भी सामाजिक पहल को केवल एक व्यक्ति की कहानी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है, ऐसे प्रयासों के पीछे स्वयंसेवकों, संगठनों और आम लोगों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है।
इसी सोच के साथ Sood Charity Foundation के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे क्षेत्रों में काम किया गया।
सफलता का अर्थ सिर्फ प्रसिद्धि नहीं
सोनू सूद का सफर एक सीधा रास्ता नहीं था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई, मुंबई में संघर्ष, फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार और फिर सामाजिक कार्यों तक पहुंचना, यह यात्रा बताती है कि करियर की शुरुआत जिस दिशा में हो, जरूरी नहीं कि मंजिल भी वही हो।
उनकी कहानी से सबसे बड़ा सबक यह निकलता है कि पहचान सिर्फ उस काम से नहीं बनती जिससे आप प्रसिद्ध होते हैं, बल्कि उस काम से भी बनती है जिससे किसी दूसरे की जिंदगी थोड़ी बेहतर होती है।
सोनू सूद के लिए अभिनय आज भी उनके करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन कोविड काल के बाद उनकी सार्वजनिक छवि ने एक नया आयाम हासिल किया। पर्दे पर निभाए किरदारों से लेकर वास्तविक जीवन में लोगों की मदद तक, उनका सफर यही दिखाता है कि सफलता का एक अर्थ अपने लिए आगे बढ़ना है और दूसरा अर्थ—आगे बढ़ते हुए दूसरों के लिए भी रास्ता बनाना।
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