देश
रेलवे कर्मचारियों का डीआरएम कार्यालय पर प्रदर्शन, मांगों को लेकर जताई नाराजगी
लखनऊ। नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे मेंस कांग्रेस के बैनर तले शुक्रवार को लखनऊ स्थित डीआरएम कार्यालय पर रेलवे कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे कर्मचारियों ने रेल प्रशासन पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने और कर्मचारियों के साथ तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने समय पर प्रमोशन, उचित ड्यूटी और रेस्ट, क्वार्टरों की बदहाल स्थिति, स्टाफ की कमी, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं और अधिकारियों के व्यवहार जैसे मुद्दे उठाए।
यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि रेलवे में कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है, जबकि ट्रेनों और अधिकारियों की संख्या बढ़ रही है। कर्मचारियों के मुताबिक कई जगहों पर निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी के बजाय अब भी 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है और इसका असर रेलवे सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की गलती की सजा हमें
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की गलतियों के लिए नियमित कर्मचारियों को चार्जशीट दी जा रही है और उनके इंक्रीमेंट तक रोके जा रहे हैं। यूनियन ने आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और प्रशासन से इसकी जांच की मांग की।
जर्जर क्वार्टर और अस्पतालों की बदहाली का मुद्दा
कर्मचारियों ने अपने आवासों की खराब स्थिति को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कई रेलवे क्वार्टरों की छतें जर्जर हैं और बारिश में पानी टपकता है। कुछ कर्मचारियों ने यहां तक कहा कि उन्हें परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है। इसके अलावा रेलवे अस्पतालों में डॉक्टरों और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया गया।
यूनियन कार्यालय तक नहीं दिया गया
यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने के लिए नियमित बैठकें और पीएनएम जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से नहीं हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि हर दो-तीन महीने में कर्मचारियों और प्रशासन के बीच बैठक होती रहे तो पुरानी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है और नई समस्याओं को समय रहते उठाया जा सकता है।
यूनियन के मंडल पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बातचीत के रास्ते बंद होने के बाद उन्हें धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।
महिला कर्मचारियों ने भी उठाई आवाज
प्रदर्शन में शामिल महिला कर्मचारियों ने भी प्रशासन पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कर्मचारी अपनी बात रखने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें कार्रवाई या नकारात्मक प्रभाव का डर रहता है। उन्होंने प्रशासन से कर्मचारियों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें अपनी समस्याएं खुलकर रखने का माहौल देने की मांग की।
यूनियन ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे मेंस कांग्रेस के पदाधिकारियों ने कहा कि यह प्रदर्शन अभी सांकेतिक है। यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आगे इससे बड़ा आंदोलन किया जा सकता है। यूनियन ने डीआरएम से कर्मचारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने और अधिकारियों को कर्मचारियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाना उनकी मजबूरी है। अब देखना होगा कि रेल प्रशासन कर्मचारियों की इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है।
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