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डेवलपमेंट की कीमत सांसों से क्यों? गुरुग्राम के डंपिंग यार्ड ने गांव को बनाया गैस चैंबर

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गुरुग्राम। देश की सबसे तेजी से विकसित हो रही शहरों में शुमार गुरुग्राम की चमक-दमक के पीछे एक ऐसी तस्वीर भी छिपी है, जो विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करती है। शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक विशाल डंपिंग यार्ड के कारण आसपास के गांवों के लोगों का जीवन दूभर हो गया है। कचरे के पहाड़ में लगने वाली आग, उससे निकलने वाला जहरीला धुआं और बदबू अब ग्रामीणों की सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बन चुकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपिंग यार्ड में आए दिन आग लगती रहती है। बारिश के बाद भी कचरे के अंदर सुलगती आग पूरी तरह नहीं बुझती, जिससे लगातार धुआं निकलता रहता है। धुएं और बदबू के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और कई बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।

गांव बना धुएं का कैदखाना

डंपिंग यार्ड के बिल्कुल पास बसे गांव के निवासियों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई लोग घरों से निकलते समय मास्क या कपड़ा बांधने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार सुबह और शाम के समय धुआं इतना घना हो जाता है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। कई परिवारों में सांस, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं।

“बारिश में और बढ़ जाती है परेशानी”

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान कचरे का बहाव सड़क तक पहुंच जाता है। कई बार सड़क पर गंदगी फैलने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। लोगों के मुताबिक डंपिंग यार्ड से निकलने वाला दूषित पानी आसपास के इलाके को भी प्रभावित करता है।

पशु-पक्षियों और पर्यावरण पर भी असर

डंपिंग यार्ड अरावली क्षेत्र और हरित क्षेत्र के नजदीक स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे के कारण पक्षियों और अन्य जीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कचरे में फंसे जानवरों और मृत पशुओं के अवशेषों से बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि आग फैल गई तो आसपास के जंगल और वन्यजीव भी खतरे में पड़ सकते हैं।

“कई बार शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं”

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने नगर निगम और प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। लोगों का कहना है कि डंपिंग यार्ड को आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाना चाहिए या फिर वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

स्वास्थ्य पर पड़ रहा गंभीर प्रभाव

गांव की बुजुर्ग महिलाओं और अन्य निवासियों ने बताया कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों को नियमित रूप से अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में गंभीर बीमारियों के मामलों में वृद्धि हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक अध्ययन सामने नहीं आया है।

विकास मॉडल पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि गुरुग्राम को स्मार्ट और विकसित शहर बनाने की कीमत गांवों के लोग अपनी सेहत और पर्यावरण से चुका रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि विकास का मतलब आसपास के गांवों को प्रदूषण और बीमारियों के हवाले करना है, तो ऐसे विकास पर पुनर्विचार होना चाहिए।

कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने हरियाणा सरकार, नगर निगम और संबंधित विभागों से मांग की है कि डंपिंग यार्ड में लगने वाली आग पर तत्काल नियंत्रण किया जाए, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह डंपिंग यार्ड न केवल पर्यावरण बल्कि हजारों लोगों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।

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