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कन्हैया की नगरी में दम तोड़ती यमुना, खुले नालों और गंदगी से आस्था पर संकट
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र वृंदावन इन दिनों यमुना प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। धार्मिक नगरी के विभिन्न घाटों पर खुले नालों और सीवर का पानी सीधे यमुना नदी में गिरता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
यमुना किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि नदी में गिरने वाले नालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नतीजतन यमुना का जल काला पड़ता जा रहा है और उससे दुर्गंध उठ रही है। कई श्रद्धालु अनजाने में इसी पानी से आचमन और स्नान कर लेते हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था पर पड़ रहा असर
स्थानीय निवासियों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालु यमुना को पवित्र मानकर स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन नदी में मिल रहे सीवर और गंदे पानी की जानकारी उन्हें नहीं होती। इससे न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं।
कई श्रद्धालुओं ने बताया कि घाटों के आसपास सफाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। नदी किनारे कूड़े के ढेर और खुले नाले धार्मिक पर्यटन की छवि को भी प्रभावित कर रहे हैं।
“बचपन से देख रहे हैं यही हाल”
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई नाले दशकों से यमुना में गिर रहे हैं। उनका आरोप है कि समय-समय पर सफाई अभियान और योजनाओं की घोषणा तो होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखाई देता।
निवासियों के मुताबिक त्योहारों और विशेष आयोजनों के दौरान घाटों की सफाई कर दी जाती है, लेकिन नियमित रखरखाव का अभाव बना रहता है।
नाव संचालकों ने भी उठाए सवाल
यमुना में नाव संचालन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि लाइसेंस और अन्य शुल्क के नाम पर उनसे राशि वसूली जाती है, लेकिन बदले में नदी और घाटों की सफाई तथा मूलभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता।
उनका कहना है कि यदि यमुना की स्वच्छता और घाटों की व्यवस्था बेहतर हो तो धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत होगी।

घाटों पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई घाटों पर कपड़े बदलने के कमरे, स्वच्छ शौचालय और कूड़ा निस्तारण जैसी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। कुछ स्थानों पर बने शौचालयों की निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि वृंदावन को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है तो यमुना की स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सीवर और नालों का पानी सीधे नदी में जाने से जल गुणवत्ता लगातार खराब होती है। इससे जलीय जीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है।
समाधान की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि यमुना में गिरने वाले नालों को तत्काल रोका जाए, सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था मजबूत की जाए और घाटों पर नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि वृंदावन की पहचान केवल मंदिरों से नहीं, बल्कि यमुना से भी है। यदि यमुना स्वच्छ नहीं रहेगी तो धार्मिक नगरी की पहचान और आस्था दोनों प्रभावित होंगी।

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