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छावनी में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर बवाल, 150 साल पुराने घर टूटे मुआवजा अब तक नहीं

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इंदौर। शहर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इंदौर नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई परिवारों को पर्याप्त समय दिए बिना उनके घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठान तोड़ दिए गए, जबकि मुआवजे और पुनर्वास को लेकर अब तक कोई स्पष्ट व्यवस्था सामने नहीं आई है।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि जिन मकानों और दुकानों पर कार्रवाई की गई, उनमें से कई संपत्तियां 100 से 150 वर्ष पुरानी हैं और पीढ़ियों से लोग यहां निवास कर रहे थे।

तीन दिन में कोई अपना घर कैसे खाली कर सकता है?

कार्रवाई से प्रभावित एक महिला ने सवाल उठाते हुए कहा कि तीन दिन के नोटिस में कोई परिवार अपना घर, दुकान और वर्षों का सामान कैसे व्यवस्थित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि इतने कम समय में आम नागरिकों से घर खाली कराने की अपेक्षा की जा रही है, तो क्या यही प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों के घरों पर भी लागू की जा सकती है?
रहवासियों का कहना है कि घर टूटने के बाद उनका अधिकांश सामान मलबे में दब गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

दुकानें टूट गईं, रोज़गार छिन गया

छावनी निवासी व्यापारी संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कई दुकानों को नुकसान पहुंचा, जिससे वर्षों से चल रहे छोटे व्यवसाय प्रभावित हो गए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि मेडिकल स्टोर, किराना और अन्य दुकानों का सामान मलबे में दब गया तथा कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने नुकसान का आकलन किए बिना कार्रवाई की।

मुआवजे और टीडीआर पर असंतोष

प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी प्रकार का प्रत्यक्ष मुआवजा नहीं मिला है। प्रशासन द्वारा ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स की व्यवस्था का उल्लेख किया जा रहा है, लेकिन रहवासियों का दावा है कि इससे उन्हें व्यावहारिक लाभ नहीं मिल रहा।
कुछ लोगों का कहना है कि यदि उनकी भूमि और संपत्तियां सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही हैं, तो उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए।

नपती से अधिक हिस्से तोड़े

कई रहवासियों ने आरोप लगाया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्सों पर तोड़फोड़ की गई। उनका दावा है कि कुछ मकानों में 10 फीट की जगह 20 से 25 फीट तक निर्माण ध्वस्त कर दिया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

सड़क चौड़ीकरण को लेकर मतभेद

कुछ स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि छावनी क्षेत्र में लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई थी और सड़क चौड़ीकरण आवश्यक था। वहीं प्रभावित परिवारों का तर्क है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर लोगों को बेघर करना उचित नहीं माना जा सकता। रहवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ पुनर्वास और मुआवजे की समुचित व्यवस्था भी की जानी चाहिए थी।

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप

प्रभावित लोगों ने दावा किया कि उन्होंने विभिन्न शिकायत पोर्टलों और हेल्पलाइन पर आवेदन दिए, लेकिन कई मामलों में उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतें लंबित हैं और अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

विरासत और पहचान पर भी उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छावनी क्षेत्र केवल एक आवासीय इलाका नहीं, बल्कि इंदौर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ा क्षेत्र है। उनका आरोप है कि विकास योजनाओं के दौरान इस ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। नगर निगम और प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण एवं यातायात सुधार के लिए यह कार्रवाई मास्टर प्लान के अनुरूप की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए कई प्रमुख मार्गों का विस्तार आवश्यक है। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ मानवीय दृष्टिकोण, पुनर्वास और उचित मुआवजा भी उतना ही जरूरी है।

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