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शास्त्री पार्क फर्नीचर मार्केट में भीषण आग, 700 से अधिक दुकानें जलकर खाक
नई दिल्ली। मशहूर शास्त्री पार्क फर्नीचर मार्केट बीती रात अचानक लगी भीषण आग में पूरी तरह स्वाहा हो गया। देखते ही देखते आग ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि करीब 700 से 800 दुकानें जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गईं। इस हादसे ने न केवल करोड़ों रुपये का कारोबार तबाह कर दिया, बल्कि ईद के ठीक पहले सैकड़ों दुकानदारों, कारीगरों, मजदूरों और ठेले वालों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
हर तरफ धुआं, जली हुई लकड़ी की गंध और अपनी जीवनभर की पूंजी खो चुके लोगों की चीखें और आंसू ही दिखाई दे रहे हैं। बाजार में अब सोफे, बेड या अलमारियां नहीं, बल्कि सिर्फ पिघला हुआ लोहा और राख बची है।

फायर ब्रिगेड की लापरवाही ने हमें बर्बाद कर दिया
हादसे के शिकार स्थानीय दुकानदारों और प्रत्यक्षदर्शियों में प्रशासन और फायर ब्रिगेड के खिलाफ भारी आक्रोश है। पीड़ितों का कहना है कि दमकल केंद्र बाजार से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन सूचना देने के बावजूद गाड़ियां डेढ़ से दो घंटे की देरी से पहुंचीं।
एक पीड़ित दुकानदार ने रोते हुए बताया, अगर फायर ब्रिगेड वाले समय पर आ जाते, तो यह पूरा कांड नहीं होता। सिर्फ एक ही दुकान जलती, पूरी मार्केट बच जाती। हमने 15-20 बार फोन किया, स्थानीय पार्षद और विधायक ने भी कॉल किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गाड़ियां बहुत देर से आईं और जब आईं भी तो शुरुआत में उनकी तादाद बेहद कम थी।
आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि सड़क किनारे लगे ऊंचे-ऊंचे पेड़ पूरी तरह झुलस कर काले हो चुके हैं। आग के खतरे को देखते हुए पास से गुजरने वाली मेट्रो सेवा और उसकी बिजली को भी एहतियातन तुरंत बंद करना पड़ा।

ईद के त्यौहार से पहले टूटा दुखों का पहाड़
यह हादसा ऐसे समय पर हुआ है जब महज 5-6 दिन बाद ही बकरा ईद का त्यौहार है। व्यापारियों ने त्यौहार के सीजन को देखते हुए भारी मात्रा में माल स्टॉक कर रखा था।
एक रोते हुए मजदूर ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, हमारी तो पूरी पूंजी जलकर राख हो गई। अब क्या खाएंगे और क्या कमाएंगे? तन पर जो कपड़े पहने हैं, बस वही बचे हैं। त्यौहार सामने है, पर हम किससे मदद मांगें? दुकान मालिक खुद सड़क पर आ गया है, और सामने वाला ठेले वाला भी हमारे जैसा ही गरीब है। अब तो भीख मांगने जैसी नौबत आ गई है।

‘गरीबों की शादियों की मार्केट’ हुई जमींदोज
शास्त्री पार्क का यह बाजार पूरी दिल्ली और आसपास के राज्यों में सबसे सस्ते फर्नीचर के लिए जाना जाता था। मध्यवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह बाजार किसी वरदान से कम नहीं था। यहाँ महज 15,000 से 20,000 रुपये में अलमारी, सोफा, बेड समेत शादी-दहेज का पूरा सामान मिल जाता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अभी दो महीने पहले ही कई परिवारों ने अपनी बेटियों की शादी का सामान यहीं से खरीदा था। इस आग ने उन उम्मीदों को भी जला दिया है जो कम बजट में अपनी बेटियों के हाथ पीले करने का सपना देख रहे थे।
कैलाश नगर की झुग्गियों पर भी मंडराया खतरा
चश्मदीदों के अनुसार, आग रात करीब 11:00 बजे ब्लॉक नंबर 8 के पास से शुरू हुई थी। हवा के साथ उड़ती चिंगारियों के कारण पास ही स्थित कैलाश नगर की झुग्गियों पर भी खतरा मंडराने लगा था। झुग्गीवासियों ने पूरी रात जागकर छतों पर पानी डाला ताकि प्लास्टिक की पन्नियों से बनी उनकी झोपड़ियां आग की चपेट में न आ जाएं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, हमारा तो बाजार से सीधा वास्ता नहीं था, लेकिन इन दुकानदारों को बिलखते देख दिल फट रहा है। इंसान को दोबारा खड़े होने में दो-तीन साल लग जाएंगे। दो साल पहले भी यहाँ आग लगी थी, लोग अभी उस घाटे से उबर भी नहीं पाए थे कि फिर यह कयामत आ गई।
सिर्फ सरकारी इमदाद का भरोसा
इस भीषण अग्निकांड ने एक झटके में हजारों जिंदगियों को पटरी से उतार दिया है। छोटे व्यापारी, मैन्युफैक्चरर, लकड़ी काटने वाले, पॉलिश करने वाले और माल ढोने वाले ठेले वाले सभी का रोजगार इस मार्केट से जुड़ा हुआ था। अब प्रभावित लोगों की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या उन्हें इस बड़ी त्रासदी से उबरने के लिए कोई आर्थिक सहायता या मुआवजा मिलेगा, या फिर वे अपने हाल पर ही छोड़ दिए जाएंगे।

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