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80 लाख का फ्लैट और मिला ‘मौत का कुआं’: गाजियाबाद के पॉश इलाके में ‘सेवन स्टार’ सोसाइटी की खुली पोल
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के सबसे पॉश और महंगे इलाकों में शुमार इंदिरापुरम की एक हाईराइज सोसाइटी में रह रहे सैकड़ों परिवार इन दिनों बिल्डर की धोखाधड़ी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। ₹80 लाख से ₹90 लाख की भारी-भरकम राशि चुकाने के बावजूद लोगों को सुख-सुविधाओं के नाम पर सिर्फ परेशानियां, डर और एक जानलेवा गड्ढा मिला है, जिसे स्थानीय निवासी ‘मौत का कुआं’ पुकार रहे हैं।
70% ग्रीन एरिया का झांसा, हकीकत में मिला सिर्फ कंक्रीट
एक स्वतंत्र मीडिया पोर्टल की ग्राउंड रिपोर्ट में सोसाइटी के चौंकाने वाले हालात सामने आए हैं। रेजिडेंट्स ने बताया कि फ्लैट बुक करते समय बिल्डर के सेल्स प्रतिनिधियों ने थ्री-लेयर स्विमिंग पूल, सेवन स्टार क्लब हाउस, बैडमिंटन कोर्ट, टेनिस कोर्ट और 70 फीसदी ग्रीन एरिया जैसे बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। लेकिन आज हकीकत इसके उलट है। वादों के विपरीत पूरे परिसर में चारों तरफ गाड़ियां खड़ी हैं, बच्चों के खेलने के लिए एक इंच जगह नहीं बची है और जिन रास्तों का वादा किया गया था, उन्हें पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट और रेरा के नियमों की सरेआम धज्जियां
सोसाइटी के निवासियों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि बिल्डर ने उन्हें बिना ओसी और सीसी के ही पजेशन दे दिया और लोग मजबूरी में यहां शिफ्ट हो गए।
एक निवासी ने बताया, कानूनन बिना ओसी के कोई बिल्डर पजेशन नहीं दे सकता। सुप्रीम कोर्ट और रेरा के सख्त निर्देश हैं, लेकिन यहां रेरा ने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं। हम लोग भारी किराया देने को मजबूर थे, इसलिए जब बिल्डर ने 4 साल की देरी के बाद 2024 में पजेशन दिया, तो हमें मजबूरी में आना पड़ा।

परिसर में खुला 2 साल पुराना गड्ढा, बच्चों की जान पर
सोसाइटी के प्रवेश द्वार के पास ही पिछले 2 साल से एक बेहद गहरा और चौड़ा गड्ढा खुला पड़ा है, जिसमें नुकीले सरिए बाहर निकले हुए हैं। सुरक्षा के नाम पर महज एक कमजोर टीन शेड लगाई गई है, जो तेज हवा में उड़ जाती है। रेजिडेंट्स का कहना है कि जरा सा पैर स्लिप होने पर किसी भी बच्चे या बुजुर्ग की जान जा सकती है। सोसाइटी में 700 से अधिक परिवार रह रहे हैं, लेकिन बच्चों को घरों के भीतर कैद रखना पड़ता है क्योंकि बाहर निकलते ही गाड़ियों का भारी ट्रैफिक और यह जानलेवा गड्ढा मौत बनकर सामने खड़ा रहता है।
फायर ब्रिगेड आने का रास्ता नहीं, हादसे को दावत दे रहा सिस्टम
सोसाइटी के हालात इतने बदतर हैं कि अगर खुदा न खास्ता कोई अग्निकांड हो जाए, तो अंदर फायर ब्रिगेड की गाड़ी घुसने तक की जगह नहीं है। रास्तों पर बेतरतीब तरीके से गाड़ियां खड़ी हैं। कुछ समय पहले नोएडा और साया गोल्ड एवेन्यू में हुए हादसों का जिक्र करते हुए निवासियों ने कहा कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा बिजली की भारी फ्लक्चुएशन और रात के समय लिफ्ट बंद होने जैसी आपातकालीन स्थितियां यहां आम बात हो चुकी हैं।
पैसे डाइवर्ट कर रहा बिल्डर, जीडीए दे रहा सिर्फ लिप सर्विस
रेजिडेंट्स ने आरोप लगाया कि बिल्डर इस प्रोजेक्ट का फंड डाइवर्ट करके सिद्धार्थ विहार और राजनगर एक्सटेंशन में चल रहे अपने अन्य 3,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में लगा रहा है। स्थानीय प्रशासन और जीडीए पूरी तरह बिल्डर से मिले हुए हैं।
हम कई बार जिलाधिकारी के पास गए। डीएम साहब ने जांच कमेटी भी बनाई, लेकिन जीडीए सचिव, एडीएम और स्थानीय एसीपी ने आज तक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया। जब हम आईजीआरएस पर शिकायत डालते हैं, तो घिसा-पिटा जवाब आता है कि ‘बिल्डर नॉन-कंप्लायंट है’। अगर वह नियमों का पालन नहीं कर रहा, तो नियामक प्राधिकरण होने के नाते जीडीए उस पर कार्रवाई क्यों नहीं करता?
मध्यम वर्गीय परिवारों ने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर इस अटैचमेंट के साथ घर खरीदा था कि उनका परिवार सुरक्षित रहेगा। लेकिन आज सिस्टम की मिलीभगत के कारण वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और अब तो बिल्डर या प्राधिकरण का कोई अधिकारी उनसे बात करने तक को तैयार नहीं है।

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