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वीआईपी रोड पर ‘नरक’: लखनऊ में प्रशासनिक उदासीनता की खुली पोल, नाले के पानी में जीने को मजबूर लोग
लखनऊ। विकास के बड़े-बड़े दावों और ‘स्मार्ट सिटी’ के नारों के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। लखनऊ से कानपुर को जोड़ने वाली मुख्य वीआईपी रोड पर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण आम जनता का जीना मुहाल हो चुका है। अभी मानसून की बारिश शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन सड़क का एक बड़ा हिस्सा नाले के गंदे पानी में डूब चुका है। स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।
सड़क पर नाला या नाले पर सड़क?
कानपुर रोड स्थित यूनियन बैंक के सामने का नजारा किसी आपदा क्षेत्र जैसा प्रतीत होता है। सड़क पर करीब आधा किलोमीटर (मेट्रो स्टेशन तक) घुटनों तक नाले का बदबूदार पानी भरा हुआ है। स्थिति इतनी खराब है कि बैंक आने-जाने वाले ग्राहकों के लिए बकायदा बेंच लगाकर अस्थाई पुल बनाना पड़ा है।
स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा, समझ नहीं आता कि सड़क पर नाला है या नाले पर सड़क। क्या सरकार के ‘अच्छे दिन’ यही हैं? पता नहीं यह समस्या हमारी कौन सी जिंदगी में सही होगी।

गंभीर बीमारियां और मच्छरों का आतंक
जलभराव के कारण पूरे इलाके में मच्छरों और मक्खियों का भयंकर प्रकोप हो गया है। स्थानीय दुकानदार और राहगीर इसी गंदे पानी के बीच खड़े होकर काम करने को मजबूर हैं। इलाके में डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
एक जूस विक्रेता ने अपनी मजबूरी साझा करते हुए बताया, लोग यहां स्वास्थ्य लाभ के लिए जूस पीने आते हैं, लेकिन चारों तरफ फैली गंदगी देखकर रुकना ही नहीं चाहते। गंदे पानी से बचने के लिए हमें लंबे गमबूट खरीदकर पहनने पड़ रहे हैं। हम अपनी सुरक्षा खुद कर रहे हैं, सरकार तो सो रही है।

रोजगार पर भारी मार, ठप हुआ व्यापार
इस प्रशासनिक नाकामी का सीधा असर स्थानीय छोटे व्यापारियों
और ठेले-खोमचे वालों पर पड़ा है। पिछले 15 दिनों से एक महीने से जलभराव के कारण ग्राहकों ने इस बाजार से दूरी बना ली है। दुकानदारों का कहना है कि गंदगी की वजह से उनका सौदा बेकार हो जाता है और कोई भी इस माहौल में रुककर खरीदारी नहीं करना चाहता। इसके अलावा, पानी भरे होने के कारण सड़क पर हर वक्त लंबा जाम लगा रहता है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों का अंबार, पर प्रशासन बेअसर
स्थानीय जनता का सबसे बड़ा आरोप यह है कि इस समस्या को लेकर नगर निगम, स्थानीय सभासद और मेयर से कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई भी सुध लेने को तैयार नहीं है। हालांकि, कुछ समय पहले मीडिया में खबर आने के बाद सड़क के एक मुख्य गड्ढे को तो भर दिया गया, लेकिन मुख्य समस्या यानी खुले मैनहोल और नाले की सफाई पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। होटल मालिकों द्वारा भी अपनी दुकानों का गंदा पानी सीधे रोड पर बहाए जाने से यह समस्या और विकराल हो गई है।
ग्राउंड जीरो की स्थिति को देखकर यह साफ है कि यह कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसके लिए बहुत बड़े बजट या समय की आवश्यकता हो। नगर निगम प्रशासन अगर केवल निम्नलिखित कदम उठा ले, तो जनता को इस नारकीय स्थिति से तुरंत राहत मिल सकती है, सड़क पर खुले पड़े मैनहोलों को तुरंत बंद किया जाए, नालों की मुकम्मल सफाई कर पानी की निकासी की व्यवस्था हो, सड़क पर अवैध रूप से पानी बहाने वाले कमर्शियल प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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