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प्रयागराज में छात्रों का संघर्ष, 4 हजार के कमरे से लेकर सपनों की तैयारी तक
प्रयागराज। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर से हजारों छात्र प्रयागराज पहुंचते हैं। यहां वे सीमित संसाधनों, आर्थिक चुनौतियों और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच अपने सपनों को साकार करने की कोशिश करते हैं। इसी वास्तविकता को जानने के लिए बतंगड़ न्यूज़ की टीम जॉर्ज टाउन इलाके में छात्रों के बीच पहुंची और उनके जीवन, संघर्ष तथा समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास किया।
एक कमरे और किचन में सिमटी तैयारी की दुनिया
जॉर्ज टाउन में रहने वाले एक छात्र ने बताया कि वह एक कमरे और छोटे से किचन वाले मकान में रहकर पढ़ाई कर रहा है। इस कमरे का मासिक किराया 4,000 रुपये है। गर्मी के मौसम में कूलर चलाने के कारण बिजली का बिल 700 से 800 रुपये अतिरिक्त आता है, जिससे कुल खर्च लगभग 5,000 रुपये तक पहुंच जाता है।
छात्र ने बताया कि अकेले रहने के कारण नियमित रूप से खाना बनाना आसान नहीं होता। ऐसे में अधिकांश समय वह टिफिन सेवा का सहारा लेता है ताकि अधिक समय पढ़ाई को दे सके।
किताबों, नोट्स और संघर्ष की कहानी
कमरे में रखी किताबें, डायरी और अध्ययन सामग्री वर्षों की मेहनत और संघर्ष की गवाही देती हैं। छात्र का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें मानसिक धैर्य, आर्थिक संतुलन और निरंतर प्रेरणा की भी आवश्यकता होती है।
भदोही जिले से आए छात्र सत्यम उपाध्याय ने बताया कि वह जनवरी में प्रयागराज आया है और फिलहाल यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगे अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर एसएससी सीजीएल जैसी भर्तियों में भी अवसर तलाशेंगे।
सत्यम ने बताया कि उनके पिता निजी शिक्षक हैं और उन्होंने ही उन्हें घर से बाहर निकलकर बड़े माहौल में तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, अगर जीवन में कुछ बड़ा करना है तो घर की सीमाओं से बाहर निकलकर संघर्ष करना ही पड़ता है।
‘सरकारी योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक नहीं पहुंचता’
छात्रों का मानना है कि राजनीतिक मंचों से छात्रों के लिए अनेक घोषणाएं और वादे किए जाते हैं, लेकिन उनका लाभ सभी जरूरतमंद युवाओं तक नहीं पहुंच पाता। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जागरूक और सक्रिय है तो वह अपने स्तर पर कुछ सुविधाएं प्राप्त कर सकता है, लेकिन अधिकांश युवाओं के लिए सरकारी योजनाओं तक पहुंच बनाना आसान नहीं होता।
पढ़ाई के साथ रोजगार की मजबूरी
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई युवाओं को आर्थिक जरूरतों के कारण छोटे-मोटे रोजगार भी करने पड़ते हैं। एक छात्र ने बताया कि परिवार पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए उन्होंने कभी रैपिडो बाइक सेवा में काम किया। बाद में उन्हें केंद्रीय विद्यालय में अनुबंध के आधार पर शिक्षक के रूप में काम मिला, जिससे पढ़ाई और आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाना संभव हुआ। छात्रों का कहना है कि लंबे समय तक घर से दूर रहने और प्रतियोगी माहौल में लगातार संघर्ष करने से मानसिक दबाव भी बढ़ता है। ऐसे समय में वे दोस्तों के साथ समय बिताकर या थोड़ी देर आराम करके स्वयं को फिर से तैयार करते हैं।
देश के विभिन्न जिलों से आते हैं छात्र
प्रयागराज के छात्रावासों और किराए के कमरों में प्रतापगढ़, भदोही, जौनपुर, वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से आए छात्र रहते हैं। सभी का उद्देश्य एक ही है, किसी सरकारी नौकरी या बेहतर करियर के माध्यम से अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाना। प्रयागराज आज भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां रहने वाले छात्रों के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद वे अपने सपनों को साकार करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। छात्रों की यह कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं की साझा हकीकत को भी सामने लाती है।

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