देश
खंडहर में तब्दील ‘शिक्षा का मंदिर’, जान जोखिम में डालकर भविष्य गढ़ रहे नौनिहाल
बक्सर। शिक्षा के अधिकार और ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ जैसे नारों के बीच बक्सर जिला के ब्रह्मपुर प्रखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। ग्राम पंचायत धुन छपरा का प्राथमिक विद्यालय आज किसी स्कूल की इमारत नहीं, बल्कि खंडहर बन चुका है। आलम यह है कि विद्यालय का मुख्य भवन पिछले 5 सालों से ध्वस्त पड़ा है, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली है।
शेरशाह सूरी के जमाने की लगती है इमारत

ब्रह्मपुर के धुन छपरा गांव स्थित इस विद्यालय की हालत ऐसी है कि दूर से देखने पर यह किसी शौचालय या मध्यकालीन खंडहर जैसा प्रतीत होता है। छतें गिर चुकी हैं, दीवारों से प्लास्टर गायब है और हर तरफ मलबे का ढेर लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसों पहले जब छत गिरी थी, तो गनीमत रही कि कोई बच्चा चोटिल नहीं हुआ, लेकिन तब से लेकर आज तक इसकी मरम्मत की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
स्वच्छ भारत अभियान के पोस्टर और हकीकत का अंतर
स्कूल की दीवारों पर ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘कचरे से कंपोस्ट’ बनाने के बड़े-बड़े उपदेश लिखे गए हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। स्कूल परिसर में कूड़ेदान तो दूर, चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। पानी पीने के लिए लगा चापाकल चालू तो है, लेकिन उसके चारों ओर जमी काई और गंदा पानी बीमारियों को दावत दे रहा है। स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले इस विद्यालय में कदम-कदम पर बदबू और गंदगी का साम्राज्य है।
दो गुरुजी के भरोसे पांच कक्षाओं का भार
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ विद्यालय शिक्षकों की कमी से भी जूझ रहा है। पांचवीं तक के इस विद्यालय में कुल जमा दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। एक स्थानीय छात्र मोहित ने बताया कि स्कूल सुबह 6:30 से 12:00 बजे तक चलता है। शिक्षक अपनी ओर से मेहनत कर रहे हैं, लेकिन बिना छत और बुनियादी सुविधाओं के पढ़ाई ‘राम भरोसे’ ही चल रही है।
अधिकारियों की चुप्पी और बच्चों का अंधकारमय भविष्य

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो कोई अधिकारी जांच करने पहुंचा और न ही भवन निर्माण के लिए कोई फंड आया। विद्यालय का टूटा हुआ भवन उन मासूम बच्चों के बिखरे हुए भविष्य का प्रतीक बन गया है। बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी दिन जर्जर दीवार का कोई और हिस्सा गिरता है और हादसा होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
एक ग्रामीण ने बताया, भवन पांच साल से ऐसे ही टूटा पड़ा है। बच्चे गांव के ही हैं, इसी खंडहर में पढ़ने को मजबूर हैं। मास्टर साहब क्या करें, जब सरकार बनवा ही नहीं रही।
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