बतंगड़ स्पेशल
भारत–पाकिस्तान तनाव चरम पर: परमाणु धमकियां, पानी की जंग और अमेरिका की भूमिका
भारत–पाकिस्तान संबंध एक बार फिर से चरम पर हैं। इस बार मामला सिर्फ बॉर्डर तक सीमित नहीं, बल्कि तीखे और खतरनाक बयानों तक पहुंच चुका है।
10 अगस्त को भारत के आर्मी चीफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ चेतावनी दी — “जल्द भारत–पाकिस्तान के बीच बड़ा युद्ध हो सकता है, और हमें एकजुट होकर तैयारी करनी होगी।”
इसके बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिका में जाकर भड़काऊ बयान देने लगे:
- सिंधु नदी पर डैम बना तो 10 मिसाइलों से उड़ा देंगे।
- पानी रोका तो भारत पर मिसाइल हमला करेंगे।
- “अगर पाकिस्तान डूबेगा, तो आधी दुनिया को साथ लेकर डूबेगा” — यानी सीधी परमाणु युद्ध की धमकी।
पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता पर सवाल
हाल के शाहीन-III मिसाइल टेस्ट की नाकामी और ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस हमलों के सामने पाकिस्तान की नाकामी ने उसकी सैन्य क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत पहले ही सिंधु और सहायक नदियों पर 20 डैम बना चुका है, और 3 बड़े प्रोजेक्ट — पक्कलदुल (2026), रातेल (2028) और कीरू (2028) — पर काम चल रहा है। इनके पूरे होने के बाद पाकिस्तान को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका में क्यों दिया बयान?
असल में आसिम मुनीर की मुलाकात अमेरिका के CENTCOM (यूएस सेंट्रल कमांड) के चीफ से करवाई गई थी।
अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत है, खासकर ईरान के खिलाफ भविष्य की संभावित कार्रवाई में। पाकिस्तान पहले भी अमेरिका के लिए ‘वार ऑन टेरर’ और अफगानिस्तान में अहम भूमिका निभा चुका है।
वॉशिंगटन उसे मंच दे रहा है, भले ही वहां से भारत-विरोधी और परमाणु धमकी जैसी बातें निकलें।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने इन बयानों को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और कहा कि यह पूरी मानवता के लिए खतरे की घंटी है। साथ ही यह भी चेताया कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियार असुरक्षित हाथों में हैं।
भारत ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि यह बयान एक तीसरे, “मित्र” कहे जाने वाले देश की धरती से दिया गया।
ट्रंप फैक्टर और आर्थिक सवाल
डोनाल्ड ट्रंप भारत की अर्थव्यवस्था पर तीखे बयान दे रहे हैं — “इंडियन इकॉनमी डेड है” — जबकि उनकी कंपनी भारत में ट्रंप टावर्स बेच रही है।
वे चाहते हैं कि भारत उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार की वकालत करे, जैसा पाकिस्तान और कुछ अन्य देश करते हैं। भारत ने इसे नकार दिया, जिससे रिश्ते और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
अब सवाल यह है — क्या भारत को ट्रंप की प्राइवेट कंपनियों को हमारी रियल एस्टेट मार्केट में काम करने देना चाहिए, जबकि वे हमें दुनिया में कमजोर दिखाने की कोशिश करते हैं?
आगे का रास्ता
अमेरिका की मौजूदा नीति, जो पाकिस्तान को मंच और सैन्य सहयोग दे रही है, पर भारत को वैश्विक मंच पर कड़ा सवाल उठाना चाहिए।
यह मामला अब सिर्फ भारत–पाक का नहीं रहा; इसमें अमेरिका, ईरान, चीन और पूरी दुनिया का स्ट्रैटेजिक बैलेंस दांव पर है।
अगर बयानबाज़ी ऐसे ही बढ़ी, तो आने वाले महीने बेहद निर्णायक हो सकते हैं।
आपकी राय:
क्या भारत को पानी, परमाणु धमकी और अमेरिकी नीति के इस तिकड़म पर सख्त कदम उठाने चाहिए?
अपने विचार नीचे कमेंट में बताइए।
-
देश1 year agoसत्ता, पैसा और अंधविश्वास – बाबा इंडस्ट्री की असली कहानी
-
देश1 year agoन्याय के लिए डंडा खाती मां! 🚨 ममता सरकार पर सवाल | Kolkata Case
-
Blog1 year agoBageshwar Baba Exposed? 😱 Miracle ✨ या Illusion 🎭
-
एजुकेशन1 year agoखमरिया गांव की शिक्षा पर संकट: ताले में बंद प्राथमिक शाला और मधुशाला बनी माध्यमिक शाला

You must be logged in to post a comment Login