देश
धरातल पर ‘विनाश’ की नदी: 3400 करोड़ का बजट फिर भी ‘विष’ उगलती हिंडन
गाजियाबाद | भारत की शान कही जाने वाली नदियाँ आज व्यवस्था की लापरवाही के कारण शर्मनाक स्थिति में पहुँच गई हैं। गाजियाबाद के पास बहने वाली हिंडन नदी इसका ज्वलंत उदाहरण है। सरकार ने नदी के पुनरुद्धार के लिए 3400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तो पास कर दिया, लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि नदी अब ‘जीवनदायिनी’ नहीं बल्कि ‘काल’ बन चुकी है। हिंडन का पानी अब नीला और काला होकर विष में तब्दील हो चुका है, जिसकी दुर्गंध 4-5 किलोमीटर तक फैल रही है।
आस्था के नाम पर खिलवाड़ और प्रशासनिक लापरवाही
हिंडन नदी के पुल से गुजरने वाले लोग अपनी धार्मिक भावनाओं के नाम पर पुराने कपड़े और पूजा सामग्री नदी में प्रवाहित कर देते हैं। किनारे पर जमा गंदगी और कूड़े के ढेर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जनता और प्रशासन दोनों ही इस नदी के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। रिपोर्ट के दौरान देखा गया कि नगर पालिका के नाले सीधे तौर पर काला और प्रदूषित पानी नदी में गिरा रहे हैं, जिससे हिंडन महज एक बड़े नाले में तब्दील हो गई है।
अवैध फैक्ट्रियों का ‘दो नंबर’ का खेल
स्थानीय निवासियों और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं का आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत से अवैध जींस और कबाड़ की फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं। करीब 20 दिन पहले तहसीलदार द्वारा जिन फैक्ट्रियों को सील किया गया था, उन्होंने पीछे से दीवार तोड़कर काम फिर शुरू कर दिया है।

जींस फैक्ट्रियां: यहां से निकलने वाला जहरीला केमिकल युक्त रंग सीधे नदी में बहाया जा रहा है।
वायु प्रदूषण: रात 12 बजे के बाद इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला धुआं इतना घना होता है कि लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है।
बीमारियों का घर बनते गांव: ‘हम भुक्तभोगी हैं’
मकरेड़ा, बहादुरपुर, अफजलपुर और निस्तौली जैसे गांवों में स्थिति भयावह है। स्थानीय ग्रामीण भावुक होकर बताते हैं, “हमारी माता जी को तीन साल से कैंसर है, हमसे ज्यादा किसे पता होगा? हमारे गांवों में जवान बच्चे हमें छोड़कर जा रहे हैं।” * सांस की समस्या: बुजुर्गों और बच्चों को रात-रात भर सांस लेने में तकलीफ होती है, जिसके कारण उन्हें आधी रात को अस्पताल भागना पड़ता है।
दूषित भूजल: नलों और समरसेबल से निकलने वाला पानी पीला पड़ चुका है। टीडीएस का स्तर 500 के पार है, जिससे हेपेटाइटिस बी, सी और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां घर-घर में फैल रही हैं।
सिस्टम की सेटिंग, सैंपल लेने से पहले ‘सफाई’
ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी प्रदूषण विभाग की टीम सैंपल लेने आती है, तो फैक्ट्रियों के साथ मिलीभगत के चलते पीछे से साफ पानी छोड़कर नदी को अस्थाई रूप से साफ दिखा दिया जाता है। टीम के जाते ही फिर से ‘नीला विष’ बहना शुरू हो जाता है।
किसान यूनियन की चेतावनी: ‘बड़ा आंदोलन होगा’
भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अवैध फैक्ट्रियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई और प्रदूषण नहीं थमा, तो एक बड़ा जन-आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
हिंडन नदी की यह स्थिति नमामि गंगे और अन्य नदी संरक्षण परियोजनाओं पर बड़े सवाल खड़े करती है। जब तक प्रशासन और सरकार धरातल पर सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक 3400 करोड़ का बजट फाइलों में ही सिमटा रहेगा और लोग असमय मौत मरते रहेंगे।
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