Connect with us

देश

‘आधुनिक वास्तुकला’ का क्रूर मजाक बना पंचनई ब्रिज, मौत के साये में सफर करने को मजबूर हजारों लोग

Published

on

सिलीगुड़ी। भारत जहाँ एक ओर विकसित राष्ट्र बनने की राह पर अग्रसर है, वहीं पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित माटीगाड़ा को जोड़ने वाला पंचनई ब्रिज सरकारी तंत्र की अनदेखी और भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। स्थानीय लोग इसे व्यंग्य में ‘आधुनिक वास्तुकला का अनूठा नमूना’ कहने लगे हैं, क्योंकि यहाँ कंक्रीट से ज्यादा ब्रिज की ‘हड्डियाँ’ यानी लोहे के सरिए नजर आते हैं।

जर्जर ब्रिज, उखड़ी सड़कें और उड़ती धूल

सिलीगुड़ी के माटीगाड़ा संलग्न पंचनई ब्रिज की हालत इस कदर खराब है कि यहाँ से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं। ब्रिज की ऊपरी सतह पूरी तरह उखड़ चुकी है। जगह-जगह से निकले नुकीले सरिए न केवल वाहनों के टायरों को फाड़ रहे हैं, बल्कि पैदल चलने वालों और ई-रिक्शा सवारों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि ब्रिज पर उड़ती धूल ने लोगों का सांस लेना दूभर कर दिया है।

भारी वाहनों का दबाव और ‘पलटी’ का डर

यह ब्रिज केवल स्थानीय संपर्क का मार्ग नहीं है, बल्कि एक व्यस्त लाइफलाइन है। जब मुख्य हाईवे (चेकपोस्ट मोड़) पर जाम लगता है, तो गैस सिलेंडरों से लदे ट्रक, भारी डंपर और बड़ी बसें इसी जर्जर ब्रिज से गुजरती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भारी लोड पड़ते ही ब्रिज कांपने लगता है।
स्थानीय चालक ने बताया, माल लोड होते ही गाड़ी के पलटी मारने का डर बना रहता है। सड़क का नामोनिशान नहीं बचा, सिर्फ सरिया दिख रहा है। झनकार मोड़ से लेकर जलपाई मोड़ तक की स्थिति नारकीय हो चुकी है।

भ्रष्टाचार के आरोपों की गूँज

ब्रिज की इस बदहाली के पीछे स्थानीय लोग सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर बजट तो पास होता है, लेकिन काम एक हफ्ते भी नहीं टिकता।
नेताओं की किस्मत चमकी, ब्रिज नहीं: लोगों का कहना है कि ठेकेदार और नेता ब्रिज बनाने के नाम पर अपनी गाड़ियाँ और संपत्ति बना रहे हैं, लेकिन जनता के लिए बास का पुल भी इससे बेहतर साबित होता। स्थानीय लोगों के अनुसार, ‘विकास’ के बड़े-बड़े दावे केवल विज्ञापनों तक सीमित हैं, जमीनी हकीकत में माटीगाड़ा क्षेत्र आज भी दशकों पीछे है।

स्कूली बच्चों और आम जनता की सुरक्षा ताक पर

इस जर्जर मार्ग से रोजाना सैकड़ों स्कूली बसें और टोटो गुजरते हैं। अभिभावकों में इस बात का खौफ है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है; उबड़-खाबड़ सड़कों पर टोटो पलट जाते हैं और महिलाएं व बच्चे चोटिल होते हैं।

चुनाव करीब, पर उम्मीदें खत्म

इलाके में मतदान की तारीखें नजदीक हैं, लेकिन जनता के बीच भारी निराशा है। लोगों का मानना है कि पार्टियां बदलती हैं, लेकिन उनकी किस्मत नहीं। सरकार के प्रति इस कदर अविश्वास पैदा हो चुका है कि अब लोग सुधार की उम्मीद भी छोड़ चुके हैं।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या इस ‘आधुनिक वास्तुकला के नमूने’ को वाकई कभी मरम्मत नसीब होगी? फिलहाल, पंचनई ब्रिज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है और यहाँ से गुजरने वाला हर शख्स अपनी जान हथेली पर लेकर चलने को मजबूर है।

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Advertisement

Trending

Copyright © 2025 Batangarh. Designed by ❤️ TrafficRaid.com