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बीकानेर के कोठड़ी स्कूल की बदहाली: जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चे, बरामदे में लग रहीं कक्षाएं
राजस्थान के बीकानेर जिले की कोठड़ी तहसील स्थित एक सरकारी विद्यालय की हालत शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयान कर रही है। यहां पहली से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं, लेकिन स्कूल भवन की स्थिति इतनी जर्जर है कि बच्चों की पढ़ाई अब खतरे के साये में हो रही है। विद्यालय में पर्याप्त कक्षाओं की कमी के कारण बच्चों को भीषण गर्मी में बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। वहीं स्कूल की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें और उखड़ता प्लास्टर हादसे की आशंका को बढ़ा रहे हैं।

दीवारों में दरारें, कभी भी हो सकता है हादसा
स्कूल भवन की हालत देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। कई जगह दीवारों का प्लास्टर हाथ लगाने मात्र से टूटकर गिर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान जलभराव और भवन की कमजोर स्थिति बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
विद्यालय प्रशासन ने भी माना कि भवन की कमी और खराब हालत के कारण कक्षाएं सुचारु रूप से संचालित करना मुश्किल हो रहा है।
तीन कमरों में आठवीं तक की पढ़ाई
विद्यालय में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं चल रही हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। मजबूरी में कई बच्चों को खुले बरामदे में बैठाया जा रहा है। राजस्थान की तेज गर्मी और धूलभरी हवाओं के बीच पढ़ाई करना बच्चों के लिए कठिन हो गया है।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष भवन मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन काम संतोषजनक नहीं हुआ। आरोप है कि मरम्मत केवल दिखावे तक सीमित रही और भवन की वास्तविक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

शौचालय और पानी की समस्या
विद्यालय में शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। कई शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं है और गंदगी फैली हुई है। छात्राओं को खुले में जाने की मजबूरी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान केवल नारों तक सीमित नजर आते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
बाल मजदूरी और शिक्षा से दूरी
विद्यालय से जुड़े लोगों ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी और खदानों में काम करने चले जाते हैं। कुछ मामलों में कम उम्र के बच्चों के वाहन चलाने जैसी गतिविधियों में शामिल होने की भी बात सामने आई है। शिक्षकों का कहना है कि वे बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास करते हैं, लेकिन गरीबी और संसाधनों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से गांव में सड़क, नाली और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्षी नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
कोठड़ी का यह विद्यालय ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों की तस्वीर पेश करता है। जर्जर भवन, सुविधाओं का अभाव और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवाल यह संकेत देते हैं कि शिक्षा के अधिकार को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए केवल योजनाएं नहीं, बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है।
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